उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazal ko husn lafzon ko maani kaun deta hai

ग़ज़ल को हुस्न लफ़्ज़ों को म'आनी कौन देता है

غزل کو حسن لفظوں کو معانی کون دیتا ہے

शायर: Chiraguddin Charagh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ल को हुस्न लफ़्ज़ों को म'आनी कौन देता है
सुख़न की इस ज़ुलेख़ा को जवानी कौन देता है

धनक के सात रंगों में तबस्सुम किस का शामिल है
सदफ़ में ज़िंदगी की ज़ौ-फ़िशानी कौन देता है

ज़बाँ लुक्नत-ज़दा हो बात भी करनी नहीं आए
उसी बच्चे को फिर ज़ोर-ए-बयानी कौन देता है

अगर छींको तो रुक जाती है धड़कन एक लम्हे को
कि दिल के साज़ को फिर से रवानी कौन देता है

जहान-ए-आब-ओ-गिल क्या है फ़क़त इक दायरा लेकिन
तख़य्युल को ख़ला की हुक्मरानी कौन देता है