उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazal ghazal mein sataish tere jamal ki hai

ग़ज़ल ग़ज़ल में सताइश तिरे जमाल की है

غزل غزل میں ستائش ترے جمال کی ہے

शायर: Qamar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ल ग़ज़ल में सताइश तिरे जमाल की है
ये दिलकशी तिरी आँखों में किस ग़ज़ाल की है

उतार दी है हर इक पेड़ ने क़बा अपनी
ख़िज़ाँ की रुत में अदा मौसम-ए-विसाल की है

है दिल की डोर में बीते हुए दिनों का हिसाब
कि एक एक गिरह एक एक साल की है

महक उठी वो जगह दो-घड़ी जहाँ बैठे
कि साँस साँस में ख़ुशबू तिरे ख़याल की है

कही न उस से कभी दिल की बात इस डर से
हर एक बात पे आदत उसे सवाल की है

ख़ला से लौट के आऊँगा फिर ज़मीं की तरफ़
मिरा उरूज अलामत मिरे ज़वाल की है