उर्दू शायरी · ग़ज़ल

garm-o-sard ek hi rut jaise hain

गर्म-ओ-सर्द एक ही रुत जैसे हैं

گرم و سرد ایک ہی رت جیسے ہیں (ردیف .. ا)

शायर: Raakesh ulfat4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गर्म-ओ-सर्द एक ही रुत जैसे हैं
अब हमारे लिए मौसम कैसा

आप को देख के ये जाना है
ख़्वाब लगता है मुजस्सम कैसा

आसमानों पे कमंदें डालो
ठान ली जाए तो जोखम कैसा

कोशिशें छोड़ दे ऐ चारागर
ज़ख़्म नासूर है मरहम कैसा