उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham diye hain to iztirab na de

ग़म दिए हैं तो इज़्तिराब न दे

غم دیئے ہیں تو اضطراب نہ دے

शायर: Gauhar Usmani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म दिए हैं तो इज़्तिराब न दे
ज़िंदगी दे मगर 'अज़ाब न दे

मुस्कुराने के हैं कई मफ़्हूम
मुस्कुरा कर कोई जवाब न दे

इस की ता'बीर किस से पूछूँगा
मेरी आँखों को कोई ख़्वाब न दे

ख़ुद-शनासी मिटाए देता है
'ऐश इतना भी बे-हिसाब न दे

मुझ को जो चाहे दे सज़ा लेकिन
मस्लहत की कोई नक़ाब न दे

तेरी ज़िद है यही अगर साक़ी
ज़हर दे दे मगर शराब न दे