उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fikr-e-ahl-e-hunar pe baiThi hai

फ़िक्र-ए-अहल-ए-हुनर पे बैठी है

فکر اہل ہنر پہ بیٹھی ہے

शायर: Badr Wasti5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़िक्र-ए-अहल-ए-हुनर पे बैठी है
शाइरी सीम-ओ-ज़र पे बैठी है

पहले हाथों में हाथ रहता था
ज़िंदगी अब कमर पे बैठी है

सहमी सहमी हुई सी हर ख़्वाहिश
दिल-ए-वहशत-असर पे बैठी है

फूल काँटों के बीच रहते हैं
ख़ुश्बू तितली के पर पे बैठी है

आस्तीनें टटोल कर देखो
दोस्ती किस डगर पे बैठी है