उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek lamha ki milen sare zamane jis mein

एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिस में

ایک لمحہ کہ ملیں سارے زمانے جس میں (ردیف .. ے)

शायर: Jaleel 'Aali'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिस में
एक नुक्ता सभी हिकमत के ख़ज़ाने जिस में

दायरा जिस में समा जाएँ जहानों की हुदूद
आइना जिस में नज़र आए अदम का भी वजूद

फ़र्श पर अर्श की अज़्मत की दलील-ए-मोहकम
ख़ल्क़ पर रहमत-ए-ख़ालिक़ की सबील-ए-मोहकम

दस्तरस उस की निगाहों की कराँ ता-ब-कराँ
वो तजस्सुस के लिए आख़िरी मंज़िल का निशाँ

एक तौसीअ' जो क़िस्मत की लकीरों में रहे
एक तंबीह जो बेदार ज़मीरों में रहे