उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek dam usne juda ki na naqab-e-ariz

एक दम उस ने जुदा की न नक़ाब-ए-आरिज़

ایک دم اس نے جدا کی نہ نقاب عارض

शायर: Faheem Gorakhpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक दम उस ने जुदा की न नक़ाब-ए-आरिज़
न हुआ दूर शब-ए-वस्ल हिजाब-ए-आरिज़

किस पे बरहम हैं बुतों का जो बना है चेहरा
किस पे लाएगा ग़ज़ब आज इताब-ए-आरिज़

लाला-ओ-गुल हैं ज़मीं पर तो फ़लक पर मह-ओ-मेहर
लेकिन इन में से नहीं कोई जवाब-ए-आरिज़

देख कर जल्वा-ए-रुख़्सार हुआ मैं बेहोश
तेज़ किस दर्जा थी अल्लाह शराब-ए-आरिज़

शो'ला-ए-तूर गुल-ए-तर मह-ओ-ख़ुर्शीद-ए-फ़लक
आशिक़ों में तिरे क्या क्या हैं ख़िताब-ए-आरिज़

न दिया मुसहफ़-ए-रुख़्सार का बोसा हम को
उस ने खोली न शब-ए-वस्ल किताब-ए-आरिज़