उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ehsas-e-be-zaban ki latafat isi mein thi

एहसास-ए-बे-ज़बाँ की लताफ़त इसी में थी

احساس بے زباں کی لطافت اسی میں تھی

शायर: R P Shokh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एहसास-ए-बे-ज़बाँ की लताफ़त इसी में थी
मैं ने कहा न कुछ कि मोहब्बत इसी में थी

ये शहर जिस में नाम कमाना मुहाल था
हम गुफ़्तुगू-ए-शहर थे शोहरत इसी में थी

वैसे तो दिल के टूटने का कुछ नहीं मलाल
लेकिन तिरे जमाल की सूरत इसी में थी

अच्छा हुआ कि देखने आया न वो हमें
चेहरे पे पत-झड़ों की भी 'इज़्ज़त इसी में थी

यारान-ए-कम-निगाह उसे देखते भी क्या
ये सादगी कि सारी क़यामत इसी में थी