उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dur se aankhen dikhati hai nai duniya mujhe

दूर से आँखें दिखाती है नई दुनिया मुझे

دور سے آنکھیں دکھاتی ہے نئی دنیا مجھے

शायर: Hafeez Jalandhari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दूर से आँखें दिखाती है नई दुनिया मुझे
गुलशन-ए-हस्ती नज़र आता है इक सहरा मुझे

अक़्ल की वादी में हूँ गुम-कर्दा-ए-मक़्सूद-ए-इश्क़
ढूँढता हूँ और नहीं मिलता कोई रस्ता मुझे

ये भी इक धोका था नैरंग-ए-तिलिस्म-ए-अक़्ल का
अपनी हस्ती पर भी हस्ती का हुआ धोका मुझे

शौक़ मेरा तालिब-ए-दीदार हो जाता अगर
देखता 'मूसा' मुझे सीना मुझे जल्वा मुझे

शाएरी क्या कफ़्श-बरदार-ए-गिरामी हूँ 'हफ़ीज़'
बे-कमाली के सिवा कोई नहीं दावा मुझे