उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din mein aane lage hain KHwab mujhe

दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे

دن میں آنے لگے ہیں خواب مجھے

शायर: Iftikhar Raghib7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे

गुफ़्तुगू सुन रहा हूँ आँखों की
चाहिए आप का जवाब मुझे

वक़्त-ए-फ़ुर्सत का इंतिज़ार करूँ
इतनी फ़ुर्सत कहाँ जनाब मुझे

ज़ोम था बे-हिसाब चाहत है
उस ने समझा दिया हिसाब मुझे

पढ़ता रहता हूँ आप का चेहरा
अच्छी लगती है ये किताब मुझे

लीजिए और इम्तिहान मिरा
और होना है कामयाब मुझे

कोई ऐसी ख़ता करूँ 'राग़िब'
जिस का मिलता रहे सवाब मुझे