उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se dil aaj tak mila hi nahin

दिल से दिल आज तक मिला ही नहीं

دل سے دل آج تک ملا ہی نہیں

शायर: Ibrat Bahraichi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से दिल आज तक मिला ही नहीं
आदमी इस पे सोचता ही नहीं

चेहरा चेहरा बहाल लगता है
शहर में जैसे कुछ हुआ ही नहीं

जो ग़रीबों पे हो रहे हैं सितम
आज तक उस का तज़्किरा ही नहीं

रोग़न-ए-तल्ख़ से जो पैदा है
उस मरज़ की कोई दवा ही नहीं

पैहम हमलों से बर्क़-ए-ताबाँ के
आशियाँ कोई भी बचा ही नहीं

क़त्ल कर के चला गया क़ातिल
दर से अपने कोई हिला ही नहीं

रोज़ के हादसों से ऐ 'इबरत'
ज़िंदगी में कोई मज़ा ही नहीं