उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhup ho tez to diwar ka saya hai bahut

धूप हो तेज़ तो दीवार का साया है बहुत

دھوپ ہو تیز تو دیوار کا سایہ ہے بہت

शायर: Jaleel Allahabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

धूप हो तेज़ तो दीवार का साया है बहुत
चंद यादों का असासा भी असासा है बहुत

बेबसी हल्क़ा-ए-ज़ंजीर बनी है यारो
ज़िंदगी हम ने तुझे टूट के चाहा है बहुत

जीते जी कितने सवालों से छुड़ाए दामन
आदमी अपने गरेबान से उलझा है बहुत

टूट जाएगा किसी दिन भी अँधेरों का तिलिस्म
सोचने वालों के ज़ेहनों में उजाला है बहुत

लोग फिर लोग हैं राई का बनाते हैं पहाड़
उड़ने वालों का हुनर हम ने भी देखा है बहुत

एक एक लम्हा भी बरसों के बराबर है 'जलील'
क़ैद-ए-तन्हाई है दिल अपना अकेला है बहुत