उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhaDakte dil ko yun dhaDkan sunaya karte hain

धड़कते दिल को यूँ धड़कन सुनाया करते हैं

دھڑکتے دل کو یوں دھڑکن سنایا کرتے ہیں

शायर: Danish Aziz12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

धड़कते दिल को यूँ धड़कन सुनाया करते हैं
खुली हों बाँहें तो उन में समाया करते हैं

ये चाहतों का चलन सीख लो तो अच्छा है
कोई मनाए तो बस मान जाया करते हैं

बहुत सी बातें नहीं होती हैं बताने की
ब-तौर-ए-ख़ास मोहब्बत छुपाया करते हैं

ख़ुदा के वास्ते तफ़्सील में न जाया करो
कि जितना पूछा हो उतना बताया करते हैं

जिन्हें हो कहना कि रुक जाएँ सब को जाने दें
मिला के हाथ ज़रा सा दबाया करते हैं

नहीफ़ दिल को सँभलने का दीजिए मौक़ा
ठहर ठहर के ये जल्वे दिखाया करते हैं

अगर ये दिल हो कि सूरज की धूप साया बने
तो अपने नाम के पौदे लगाया करते हैं

जिन्हें लिखा हो किसी ने बड़ी मोहब्बत से
बड़े अदब से वो नामे जलाया करते हैं

वो जिन के दम से गुलों पर निखार आता हो
बहार आए तो उन को बुलाया करते हैं

समझ लो बात छुपाएँगे झूट बोलेंगे
जो बात करते हुए सर खुजाया करते हैं

न देख पाना अलग सा बढ़ावा देता है
चराग़ वस्ल से पहले बुझाया करते हैं

मिरे अज़ीज़ ऐ 'दानिश-अज़ीज़’ बात समझ
जिन्हें हो ज़ो'म उन्हें आज़माया करते हैं