उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agarche usne likha hua hai jahan-e-fani mein mar dena

अगरचे उस ने लिखा हुआ है जहान-ए-फ़ानी में मार देना

اگرچہ اس نے لکھا ہوا ہے جہان فانی میں مار دینا

शायर: Danish Aziz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगरचे उस ने लिखा हुआ है जहान-ए-फ़ानी में मार देना
मकान वाले से इल्तिजा है कि ला-मकानी में मार देना

मिरे अज़ीज़ो मैं जा रहा हूँ मिरी वसिय्यत को याद रखना
जो मुझ सा कोई भी एक देखो उसे जवानी में मार देना

मुझे है मालूम ऐ मुसन्निफ़ कि मेरा किरदार सानवी है
जहाँ इज़ाफ़ी लगे तुम्हें ये मुझे कहानी में मार देना

मैं जानता हूँ कि ज़ोफ़-ए-पीरी तो छीन लेता है बोलना भी
ज़बाँ में लुक्नत से पेशतर ही मुझे रवानी में मार देना

उन्हें बुढ़ापे में छोड़ना मत नहीफ़ ख़्वाबों को तोड़ना मत
ज़ईफ़ माँ बाप को न तुम उन की ज़िंदगानी में मार देना

मुझे तुम्हारे सितम की निस्बत करम तुम्हारा अज़ीज़-तर है
सो दश्त-ए-ग़म से बचा के सहरा-ए-मेहरबानी में मार देना

अगर ये डर है कि आस्तीं पर मिरे लहू के निशान होंगे
तुम्हें सुहूलत मैं दे रहा हूँ कि मुझ को पानी में मार देना

सभी मोहब्बत की बात करते हैं मैं मोहब्बत निभा रहा हूँ
सो मारना हो तो अपने 'दानिश' को जुर्म-ए-सानी में मार देना