उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekhne ko kya hai mere samne

देखने को क्या है मेरे सामने

دیکھنے کو کیا ہے میرے سامنے

शायर: Zaan Farzaan9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखने को क्या है मेरे सामने
आइना रक्खा है मेरे सामने

बा'द उस के और तो क्या होना था
इक नई दुनिया है मेरे सामने

कुछ नज़र आता नहीं तेरे सिवा
जब भी तू आता है मेरे सामने

पीठ पीछे क्या हुआ होगा वो भी
जो नहीं होता है मेरे सामने

कश्ती तू मुझ को बचा तो लेगी ना
इक तलातुम सा है मेरे सामने

मैं मुख़ातिब सिर्फ़ इस से ही रहा
मेरा जो साया है मेरे सामने

सोचा था बातें करेंगे और तू
रूठ के बैठा है मेरे सामने

फ़ोन पर क्या कुछ नहीं कहता मगर
चुप खड़ा रहता है मेरे सामने

फ़ख़्र से मेरा ख़ुदा कह सकता है
'ज़ान' बस झुकता है मेरे सामने