उर्दू शायरी · ग़ज़ल

daur-e-rafta dekh leta hun gulistan dekh kar

दौर-ए-रफ़्ता देख लेता हूँ गुलिस्ताँ देख कर

دور رفتہ دیکھ لیتا ہوں گلستاں دیکھ کر

शायर: Hafeez Jalandhari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दौर-ए-रफ़्ता देख लेता हूँ गुलिस्ताँ देख कर
गुल को ख़ंदाँ देख कर बुलबुल को गिर्यां देख कर

नाख़ुदा पर मुतमइन थे बंदगान-ए-नाख़ुदा
अब ख़ुदा याद आ रहा है मौज-ए-तूफ़ाँ देख कर

संग-दिल समझा बरहमन शैख़ समझे हद मज़ाक़
हँस पड़े दोनों मुझे अब तक मुसलमाँ देख कर

शिकवा फ़रमाते ही उल्टी मिन्नतें करनी पड़ीं
दिल पशेमाँ हो गया उन को पशेमाँ देख कर

इस मशक़्क़त-गाह में राहत का ये गोशा 'हफ़ीज़'
देख लो और ख़ुश रहो गोर-ए-ग़रीबाँ देख कर