उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chashm-e-dil jis ki rah takti hai

चश्म-ए-दिल जिस की राह तकती है

چشم دل جس کی راہ تکتی ہے

शायर: Iftikhar Raghib9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चश्म-ए-दिल जिस की राह तकती है
अब वो बिजली कहाँ चमकती है

देर लगती है जिस को जलने में
आग वो देर तक दहकती है

तुझ से मिलने की आस की चिड़िया
सेहन-ए-दिल में बहुत चहकती है

दिल दहलता है दूसरी का भी
एक दीवार जब दरकती है

छुपने वाली नहीं मिरी चाहत
तेरी आँखों में जो चमकती है

तिश्नगी मेरी जिस से है मंसूब
वो सुराही कहाँ छलकती है

जाने कब वो करें वफ़ा दिल से
रोज़ चश्म-ए-वफ़ा फड़कती है

जलने वालों से कोई क्या पूछे
क्यों उन्हें रौशनी खटकती है

आस टूटी तो साथ ही 'राग़िब'
साँस की डोर टूट सकती है