उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chand mein hai koi pari shayad

चाँद में है कोई परी शायद

چاند میں ہے کوئی پری شاید

शायर: Pankaj Subeer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँद में है कोई परी शायद
इस लिए है ये चाँदनी शायद

लोग उस को मसीहा कहते थे
वैसे वो भी था आदमी शायद

दिल का दरवाज़ा खोल रक्खा है
यूँ ही आ जाएगा कोई शायद

साँस आती है साँस जाती है
इस को कहते हैं ज़िंदगी शायद

आप का ज़िक्र हो मुसलसल हो
बस यही तो है शाइ'री शायद

मेरे आँसू तुम्हारी आँखों में
अब भी बाक़ी है दोस्ती शायद