उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chand ki apni kahani raat ka qissa alag

चाँद की अपनी कहानी रात का क़िस्सा अलग

چاند کی اپنی کہانی رات کا قصہ الگ

शायर: Pankaj Subeer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँद की अपनी कहानी रात का क़िस्सा अलग
दास्तान-ए-इश्क़ में है तजरबा सब का अलग

अजनबी हम आज से हैं पर सफ़र तो है वही
सिर्फ़ कह देने से होता है कहीं रस्ता अलग

एक लम्हा बस वही है और बाक़ी कुछ नहीं
ज़िंदगी सारी अलग और वस्ल का लम्हा अलग

रौशनी दीपक की सूरज चाँद की अपनी जगह
नूर से रौशन तिरे माथे का ये टीका अलग

इश्क़ के बीमार पर सारी दवाएँ बे-असर
चारा-गर उस की दवा का है ज़रा नुस्ख़ा अलग

चलते चलते आप ने देखा था हम को बस यूँ ही
शहर में उस दिन से अपना हो गया रुत्बा अलग