उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDe adab se ghurur-e-sitam-garan bola

बड़े अदब से ग़ुरूर-ए-सितम-गराँ बोला

بڑے ادب سے غرور ستمگراں بولا

शायर: Hafeez Merathi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़े अदब से ग़ुरूर-ए-सितम-गराँ बोला
जब इंक़लाब के लहजे में बे-ज़बाँ बोला

तकोगे यूँही हवाओं का मुँह भला कब तक
ये ना-ख़ुदाओं से इक रोज़ बादबाँ बोला

चमन में सब की ज़बाँ पर थी मेरी मज़लूमी
मिरे ख़िलाफ़ जो बोला तो बाग़बाँ बोला

यही बहुत है कि ज़िंदा तो हो मियाँ-साहब
ज़माना सुन के मिरे ग़म की दास्ताँ बोला

हिसार-ए-जब्र में ज़िंदा बदन जलाए गए
किसी ने दम नहीं मारा मगर धुआँ बोला

असर हुआ तो ये तक़रीर का कमाल नहीं
मिरा ख़ुलूस मुख़ातब था मैं कहाँ बोला

कहा न था कि नवाज़ेंगे हम 'हफ़ीज़' तुझे
उड़ा के वो मिरे दामन की धज्जियाँ बोला