उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baad-e-saba ye zulm KHuda-ra na kijiyo

बाद-ए-सबा ये ज़ुल्म ख़ुदा-रा न कीजियो

باد صبا یہ ظلم خدارا نہ کیجیو

शायर: Hafeez Merathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बाद-ए-सबा ये ज़ुल्म ख़ुदा-रा न कीजियो
इस बेवफ़ा से ज़िक्र हमारा न कीजियो

ग़म की कमी नहीं है जहान-ए-ख़राब में
ऐ दिल तरस तरस के गुज़ारा न कीजियो

ऐ साहब-ए-उरूज तू बाम-ए-उरूज से
सूरज के डूबने का नज़ारा न कीजियो

ऐसा न हो कि लोग हमें पूजने लगें
इतना भी एहतिराम हमारा न कीजियो

साहिल अगर नसीब भी हो जाए ऐ 'हफ़ीज़'
तूफ़ाँ से भूल कर भी किनारा न कीजियो