उर्दू शायरी · ग़ज़ल

alam ki baat kya samjhen KHushi ka raaz kya jaanen

अलम की बात क्या समझें ख़ुशी का राज़ क्या जानें

الم کی بات کیا سمجھیں خوشی کا راز کیا جانیں

शायर: Jagdish Mehta Dard6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अलम की बात क्या समझें ख़ुशी का राज़ क्या जानें
ख़बर अपनी नहीं जिन को किसी का राज़ क्या जानें

जिन्हें पेचीदगी हालात की पाबंद रखती है
वो जाने भी किसी की ज़िंदगी का राज़ क्या जानें

ये 'उक़्दा ख़ास है इस को कोई मंसूर खोलेगा
ख़िरद वाले जुनून-ए-आगही का राज़ क्या जानें

असीरान-ए-फ़रेब-आराइ-ए-दैर-ओ-हरम आख़िर
सुलगते 'आरिज़ों की दिलकशी का राज़ क्या जानें

मुनासिब था ये मौज़ू'-ए-सुख़न भी मय-परस्तों से
जनाब-ए-शैख़ लुत्फ़-ए-मय-कशी का राज़ क्या जानें

जनाब-ए-दर्द से पूछो कि लुत्फ़-ए-दिल-लगी क्या है
जो दिल रखते नहीं दिल की लगी का राज़ क्या जानें