उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq mein jaanna zaruri hai

'इश्क़ में जानना ज़रूरी है

عشق میں جاننا ضروری ہے

शायर: Aalam Nizami8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'इश्क़ में जानना ज़रूरी है
क्या नहीं और क्या ज़रूरी है

काम लीजिए दिमाग़ से लेकिन
दिल से भी मशवरा ज़रूरी है

दार-ए-ज़ुल्मत में रौशनी के लिए
नुस्ख़ा-ए-कीमिया ज़रूरी है

छेड़ कर छोड़ ने में ख़तरा है
साँप को मारना ज़रूरी है

रिश्ता रखिए मसर्रतों से मगर
ग़म से भी राब्ता ज़रूरी है

ख़ामुशी अच्छी चीज़ है लेकिन
वक़्त पर बोलना ज़रूरी है

जो भी पत्थर-सिफ़त हैं उन से ज़रा
आईनो फ़ासला ज़रूरी है

आरज़ू है अगर गुलाबों की
शाख़-ए-गुल से वफ़ा ज़रूरी है