उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aah-o-nala ne kuchh asar na kiya

आह-ओ-नाला ने कुछ असर न किया

آہ و نالہ نے کچھ اثر نہ کیا

शायर: Radhe Shiyam Rastogi Ahqar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आह-ओ-नाला ने कुछ असर न किया
हिज्र की शाम को सहर न किया

तल्ख़ी-ए-सब्र ख़ुश-गवार हुई
ज़हर ने भी मुझे असर न किया

सर को फोड़ा जो कोहकन ने तो क्या
इश्क़ में किस ने नज़्र-ए-सर न किया

कौन सी ऐसी आफ़त आई जब
आसमाँ ने मुझे सिपर न किया

काँपता है वो दिल ग़ज़ब से तिरे
जिस ने ऐ बुत ख़ुदा का डर न किया

जिस ने देखा वो रोए आतिशनाक
फिर गुमाँ उसे ने बर्क़ पर न किया

कूच अपना भी हो गया 'अहक़र'
ग़म-ओ-अंदोह ने सफ़र न किया