नात लिरिक्स

Zindagi Yun To Sab Jee Rahe Hain Magar Is Tarah Ka Ho Jeena To Kya Baat Hai

ज़िंदगी यूँ तो सब जी रहे हैं मगर इस तरह का हो जीना तो क्या बात है

नात ख़्वान: फ़हीम अख़्तर बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़िंदगी यूँ तो सब जी रहे हैं मगरइस तरह का हो जीना तो क्या बात हैदाएँ बग़दाद हो, बाएँ अजमेर होसामने हो मदीना तो क्या बात है

मुश्क-ओ-'अंबर की भी मुझ को हाजत नहीं'इत्र की भी मुझे अब ज़रुरत नहींबा'द मरने के रुख़ पर मलो, दोस्तो !मुस्तफ़ा का पसीना तो क्या बात है

हम चले काश ! घर से जो तयबा नगरहो शुरू' आ'ला हज़रत के दर से सफ़रमेरी माँ की दु'आ हो शरीक-ए-सफ़रआए हज का महीना तो क्या बात है

या ख़ुदा ! बस यही इल्तिजा है मेरीकू-ए-सरकार में हाज़िरी हो मेरीफ़ज्र का वक़्त हो और जुम्मे का हो दिनऔर हो हज का महीना तो क्या बात है

है तमन्ना मेरी, आरज़ू है यहीकाश ! मैं देख लेता जो रू-ए-नबीरश्क करता मुक़द्दर मेरी मौत परहोता शहर-ए-मदीना तो क्या बात है

एक ताजुश्शरी'आ हैं रहबर मेरेजिन का साया हमेशा है सर पर मेरेसामने आप के मैं भी हाज़िर रहूँबा-अदब बा-क़रीना तो क्या बात है

इस तरह आ'ला हज़रत का परचम उठेइस तरह आ'ला हज़रत का ना'रा लगेजिस की हैबत से हर दुश्मन-ए-दीन काछूट जाए पसीना तो क्या बात है

दीप रौशन हो हर दिल में ईमान काकाश ! हर कोई हाफ़िज़ हो क़ुरआन काहर किसी का कलाम-ए-ख़ुदा से अगरजगमगाए जो सीना तो क्या बात है

ऐ शु'ऐब ! अपनी क़िस्मत पे तू नाज़ करहक़ त'आला की रहमत पे तू नाज़ करतुझ को इस 'उम्र में ना'त-ए-सरकार कामिल गया है ख़ज़ीना तो क्या बात है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।