ज़माने की निग़ाहों में वो रुस्वा हो नहीं सकतानबी कर दें जिसे ऊँचा वो नीचा हो नहीं सकता
कभी उस शख्स के ऐबों का चर्चा हो नहीं सकताभरम जिस का नबी रखें वो रुस्वा हो नहीं सकता
रसूले-पाक को हमने ख़ुदा का नूर माना हैहमारी क़ब्र में हरगिज़ अँधेरा हो नहीं सकता
बिठाते थे मेरे सरकार जिन को अपने कांधों परहुसैन इब्ने अली जैसा नवासा हो नहीं सकता
हर एक ज़र्रा ज़मीने-कर्बला का झूम कर बोलाकोई बच्चा अली असग़र के जैसा हो नहीं सकता
ज़मीने-हिन्द पर अब भी मेरे ख़्वाजा का क़ब्ज़ा हैयहाँ इनके अलावा कोई राजा हो नहीं सकता
किसी की भी हुकूमत हो, कोई भी राज करता होमगर ख़्वाजा पिया सा कोई राजा हो नहीं सकता
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