नात लिरिक्स

Zamana Bahut Khubsurat Hai Lekin Madine Ke Bazar Jaisa Nahin Hai

ज़माना बहुत ख़ूबसूरत है लेकिन मदीने के बाज़ार जैसा नहीं है

नात ख़्वान: शकील आरफ़ी फ़र्रूख़ाबादीशायर: शकील आरफ़ी फ़र्रूख़ाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़माना बहुत ख़ूबसूरत है लेकिन मदीने के बाज़ार जैसा नहीं हैसबब इस का ये है कि सारी ज़मीं पर कहीं और आक़ा का रौज़ा नहीं है

अज़ानें भी होतीं, नमाज़ें भी होतीं, बहुत 'इल्म होता मगर ये भी होतानबी के नवासे न गर्दन कटाते तो सब कहते इस्लाम ज़िंदा नहीं है

कोई चढ़ते सूरज से कह दे किसी दिन, भरी दो पहर में तुझे देख लूँगाअभी मेरी आँखें मुकम्मल नही हैं, अभी उन का दर मैं ने देखा नहीं है

वो जब चाहें मुश्किल को आसान कर दें, वो जब चाहें मँगतों को सुल्तान कर देंशह-ए-दीं का दस्त-ए-'इनायत न पूछो, समंदर भी इतना कुशादा नहीं है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।