नात लिरिक्स

Ye Wo Sach Hai Ke Jise Ek Jahan Maan Gaya | Nematen Bant.ta Jis Samt Wo Zeeshan Gaya With Tazmeen

ये वो सच है कि जिसे एक जहाँ मान गया | नेमतें बाँटता जिस सम्त वो ज़ीशान गया तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: क़ारी रेहान हबीब सुहरवर्दीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ये वो सच है कि जिसे एक जहाँ मान गयादर पे आया जो गदा, बन के वो सुलतान गयाउस के अंदाज़-ए-नवाज़िश पे मैं क़ुर्बान गयाने'मतें बाँटता जिस सम्त वो ज़ीशान गयासाथ ही मुंशी-ए-रहमत का क़लम-दान गया

तुझ से जो फेर के मुँह जानिब-ए-क़ुरआन गयासुर्ख़-रू हो के न दुनिया से वो इंसान गयाकितने गुस्ताख़ बने, कितनों का ईमान गयाले ख़बर जल्द कि ग़ैरों की तरफ़ ध्यान गयामेरे मौला मेरे आक़ा ! तेरे क़ुर्बान गया

महव-ए-नज़्ज़ारा सर-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा ही रहीदूर से सज्दा-गुज़ार-ए-दर-ए-वाला ही रहीरू-ब-रू पा के भी महरूम-ए-तमाशा ही रहीआह ! वो आँख कि नाकाम-ए-तमन्ना ही रहीहाए ! वो दिल जो तेरे दर से पुर-अरमान गया

तेरी चाहत का 'अमल ज़ीस्त का मंशूर रहातेरी दहलीज़ का फेरा, मेरा दस्तूर रहाये अलग बात कि तू आँख से मस्तूर रहादिल है वो दिल जो तेरी याद से मा'मूर रहासर है वो सर जो तेरे क़दमों पे क़ुर्बान गया

दोस्ती से कोई मतलब न मुझे बैर से कामउन के सदक़े में किसी से न पड़ा ख़ैर से कामउन का शैदा हूँ, मुझे क्या हरम-ओ-दैर से कामउन्हें जाना, उन्हें माना, न रखा ग़ैर से कामलिल्लाहिल-हम्द मैं दुनिया से मुसलमान गया

एहतिराम-ए-नबवी दाख़िल-ए-'आदत न सहीशीर-ए-मादर में असीलों की नजाबत न सहीघर में आदाब-ए-रिसालत की रिवायत न सहीऔर तुम पर मेरे आक़ा की 'इनायत न सहीनज्दियो ! कलमा पढ़ाने का भी एहसान गया

बाम-ए-मक़्सद पे तमन्नाओं के ज़ीने पहुँचेलब-ए-साहिल पे, नसीर ! उन के सफ़ीने पहुँचेजिन को ख़िदमत में बुलाया था नबी ने, पहुँचेजान-ओ-दिल, होश-ओ-ख़िरद सब तो मदीने पहुँचेतुम नहीं चलते, रज़ा ! सारा तो सामान गया

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:पीर नसीरुद्दीन नसीर

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