जश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है?लाओ क़ुरआं में दिखाओ ! ये कहाँ लिखा है?
जिन के मीलाद पे जिब्रील लगाएं झंडेंउन का झंडा न लगाओ ! ये कहाँ लिखा है?
जश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है?लाओ क़ुरआं में दिखाओ ! ये कहाँ लिखा है?
जिन की महफ़िल में फ़रिश्ते भी अदब से आएंउन की महफ़िल में न आओ ! ये कहाँ लिखा है?
जश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है?लाओ क़ुरआं में दिखाओ ! ये कहाँ लिखा है?
पानी आक़ा के वुज़ू का थे सहाबा पीतेपूछो असहाब से जाओ ! ये कहाँ लिखा है?
जश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है?लाओ क़ुरआं में दिखाओ ! ये कहाँ लिखा है?
चाँद-सूरज को इशारों पे चलाया जिस नेउन को अपना सा बताओ ! ये कहाँ लिखा है?
जश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है?लाओ क़ुरआं में दिखाओ ! ये कहाँ लिखा है?
जिन के टुकड़ों से पला करते हैं दोनों आलमउन का लंगर न खिलाओ ! ये कहाँ लिखा है?
जश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है?लाओ क़ुरआं में दिखाओ ! ये कहाँ लिखा है?
क़ासमी ! उन के लिए नात यही काफ़ी हैवो जो कहते हैं ये बताओ ! ये कहाँ लिखा है?
जश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है?लाओ क़ुरआं में दिखाओ ! ये कहाँ लिखा है?
केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।