नात लिरिक्स

Ye Duniya Kaisi Duniya Hai ! Sab Apna Paraya Karte Hain

ये दुनिया कैसी दुनिया है ! सब अपना पराया करते हैं

नात ख़्वान: सागर कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी

ये दुनिया कैसी दुनिया है ! सब अपना पराया करते हैंएक रहमत-ए-आलम ही सब को सीने से लगाया करते हैं

अल्फ़ाज़ नहीं, जुमले भी नहीं, कैसे मैं करूँ उन की मिदहतमौला के फ़रिश्ते ख़ुद जिन को झूले में झुलाया करते हैं

एक मैं ही नहीं हूँ शैदाई, सरकार के नूरी जल्वों केदीदार की ख़ातिर सिदरा से जिब्रील भी आया करते हैं

सूरज को पसीना आता है और चाँद कहीं छुप जाता हैसरकार-ए-मदीना चेहरे से जब पर्दा हटाया करते हैं

दुश्मन का कलेजा फटता है, उश्शाक़ मचलने लगते हैंजब ताज-ए-शरीअ'त का, सागर ! हम ना'रा लगाया करते हैं

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