नात लिरिक्स

Ya Rab Meri Qismat Mein Ik Aisa Safar Likh De

या रब मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख दे

नात ख़्वान: मुफ़्ती कौसर रूहानीशायर: मुफ़्ती कौसर रूहानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

मैं शहर मदीने के हर कूचा-गली घूमूँफिर फिर के मैं नक़्श-ए-क़दम-पाक-ए-नबी चूमूँमहबूब के क़दमों में हो जाए मेरा घर लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

जानिब जो मदीने की जब क़ाफ़िले चलते हैंमेरा दिल भी तड़पता है, आँसू नहीं रुकते हैंमरने से क़ब्ल इस दर पर मेरी ये नज़र लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

कल रोज़-ए-क़यामत में जब कर्ब की हालत होमेरे सर पे भी प्यारे नबी की नज़र-ए-शफ़ा'अत होकरता हूँ मोहब्बत उन से, संग उन के हशर लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

डूबा है गुनाहों में रूहानी भी सर-ता-क़दमशेवा है मगर तेरा, ऐ मेरे मौला ! करमहक़दार नहीं हूँ फिर भी दु'आओं में असर लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख देमक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे

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