नात लिरिक्स

Ya Nabi Sab Karam Hai Tumhara Ye Jo Ware Niyare Hue Hain

या नबी सब करम है तुम्हारा ये जो वारे नियारे हुए हैं

नात ख़्वान: प्रोफ़ेसर अब्दुर्रऊफ़ रूफ़ीशायर: ज़ाहिद नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैंअब कमी का तसव्वुर भी कैसा, जब से मँगते तुम्हारे हुए हैं

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

कोई मुँह न लगाता था हम को, पास तक न बिठाता था हम कोजब से थामा है दामन तुम्हारा, दुनिया वाले हमारे हुए हैं

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

उन के दरबार से जब भी मैं ने, पंजतन के वसीले से माँगामुझ को ख़ैरात फ़ौरन मिली है, ख़ूब मेरे गुज़ारे हुए हैं

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

दूर होने को है अब ये दूरी, उन की चौखट पे होगी हुज़ूरीख़्वाब में मुझ को आक़ा के दर से हाज़री के इशारे हुए हैं

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

देख कर उन के रौज़े के जल्वे, मुझ को महसूस ये हो रहा थाजैसे मंज़र ये सारे के सारे आसमाँ से उतारे हुए हैं

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

हश्र के रोज़ जब मेरे आक़ा उम्मती की शफ़ा'अत करेंगेरब कहेगा, उन्हें मैं ने बख़्शा जो दिवाने तुम्हारे हुए हैं

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

ख़्वाजा अजमेर, ग़ौस-ए-जली हों, दाता ला-सानी, मेहर-ए-'अली होंजिन के लजपाल रब के वली हों, कब कहीं बे-सहारे हुए हैं !

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

चाहते हो अगर नेक-नामी, आल-ए-ज़हरा की कर लो ग़ुलामीइन के सदक़े में, ज़ाहिद नियाज़ी ! पुर-सुकूँ ग़म के मारे हुए हैं

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं

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