नात लिरिक्स

Ya Nabi Mujh Pe Bhi Ek Nigah-e-Karam | Tujh Ko Bheja Gaya Hai Karam Ke Liye

या नबी मुझ पे भी इक निगाह-ए-करम | तुझ को भेजा गया है करम के लिए

नात ख़्वान: ख़्वाजा अली काज़िमशायर: ज़ीशान मेहदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

करम की भीक दर-ए-मुस्तफ़ा से माँगते हैंहम अपनी हाजतें हाजत-रवा से माँगते हैंउन्हें ख़बर है कि हम लोग मुश्किलों से नजातवसीला उन को बना कर ख़ुदा से माँगते हैं

या नबी ! मुझ पे भी इक निगाह-ए-करमतुझ को भेजा गया है करम के लिएसरवर-ए-अंबिया ताजदार-ए-हरम !तुझ को भेजा गया है करम के लिए

या नबी ! मुझ पे भी इक निगाह-ए-करमतुझ को भेजा गया है करम के लिए

रश्क-ए-फ़िरदौस बन जाए दुनिया मेरीएक लुत्फ़-ए-नज़र मुझ पे भी, या नबी !पास आए ख़ुशी, दूर हो जाए ग़मतुझ को भेजा गया है करम के लिए

या नबी ! मुझ पे भी इक निगाह-ए-करमतुझ को भेजा गया है करम के लिए

वज्ह-ए-रहमत तेरी ज़ात पुर-नूर हैसारी मख़्लूक़ में बात मशहूर हैक्या फ़लक, क्या ज़मीं, क्या 'अरब, क्या 'अजमतुझ को भेजा गया है करम के लिए

या नबी ! मुझ पे भी इक निगाह-ए-करमतुझ को भेजा गया है करम के लिए

दो जहानों का मालिक बनाया तुझेहर तरह से नवाज़ा है अल्लाह नेतू ही आ'ला-ओ-अर्फ़ा' तुही मुहतरमतुझ को भेजा गया है करम के लिए

या नबी ! मुझ पे भी इक निगाह-ए-करमतुझ को भेजा गया है करम के लिए

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