नात लिरिक्स

Ya Nabi Mera Naseeba Yun Jagaya Jaae

या नबी मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: सैफ़ क़ादरी इलाहाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कर दो करम, या रसूलल्लाह !कर दो करम, या हबीबल्लाह !

या रसूलल्लाह ! सुन लीजे मेरी फ़रियाद कोदिल मेरा ग़मगीन है, ऐ ग़म-ज़दों के ग़म-गुसार !

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाएदिल है बेचैन मुझे दर पे बुलाया जाए

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

मदीने क़ाफ़िले जाते हैं, मैं भी आऊँगाहुज़ूर ! कितने ही आते हैं, मैं भी आऊँगा

ग़ुलाम आप के जितने ग़रीब हों फिर भीग़ुलाम आते हैं जाते हैं, मैं भी आऊँगा

बाँध कर शाह-ए-मदीना की वफ़ा का एहरामचल, ऐ दिल ! फेरा मदीने का लगाया जाए

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

जब कोई पूछे कि जन्नत का है नक़्शा कैसामेरे आक़ा का उसे रौज़ा दिखाया जाए

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

मेरे लजपाल के दरबार से कोई साइलकभी महरूम गया हो तो बताया जाए

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

हर घड़ी लुत्फ़ हुज़ूरी का उठाने के लिएसब्ज़ गुंबद को निगाहों में बसाया जाए

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

हर तरफ़ से ये सदा आएगी रोज़-ए-महशरमेरे आक़ा ! मुझे दोज़ख़ से बचाया जाए

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

काश ! आक़ा ये फ़रिश्तों से कहें जन्नत मेंहै कहाँ सैफ़, ज़रा उस को बुलाया जाए

या नबी ! मेरा नसीबा यूँ जगाया जाए

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