नात लिरिक्स

Amina Bi Ke Pyare Ka Jashn Manao Mil Ke (All Versions)

आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुशियाँ मनाओ, झंडे लगाओ, घर को सजाओ मिल केअपने नबी की 'अज़मत के तुम गीत सुनाओ मिल के

चराग़ाँ ही चराग़ाँ हों, ख़ुशी के शादियाने होंमेरे आक़ा की आमद है, सदाएँ मरहबा की हों

वाली-ए-मक्का, वाली-ए-तयबा और दुनिया के वालीआमिना बी के घर आए हैं, महकी डाली डाली

हर जानिब ये धूम मची हैहर जानिब ये धूम मची है

आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल केआमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !हुज़ूर की आमद ! मरहबा !पुर-नूर की आमद ! मरहबा !आक़ा की आमद ! मरहबा !दाता की आमद ! मरहबा !सच्चे की आमद ! मरहबा !मरहबा ! मरहबा !

बि-हम्दिल्लाह, 'अब्दुल्लाह का नूर-ए-नज़र आयामुबारक, आमिना का नूर-ए-दिल लख़्त-ए-जिगर आया

ये 'अब्दुल-मुत्तलिब की ख़ूबी-ए-क़िस्मत कि इन के घरचराग़-ए-ला-मकाँ, कौन-ओ-मकाँ का ताजवर आया

आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल केआमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के

ख़ुशियाँ मनाओ, झंडे लगाओ, घर को सजाओ मिल केअपने नबी की 'अज़मत के तुम गीत सुनाओ मिल के

चराग़ाँ ही चराग़ाँ हों, ख़ुशी के शादियाने होंमेरे आक़ा की आमद है, सदाएँ मरहबा की हों

वो ख़त्मुल-अंबिया तशरीफ़ फ़रमा होने वाले हैंनबी हर एक पहले से सुनाता ये ख़बर आया

रबी'-ए-पाक ! तुझ पर अहल-ए-सुन्नत क्यूँ न क़ुर्बा होंकि तेरी बारहवीं तारीख़ वो जान-ए-क़मर आया

मरहबा ! मरहबा !

आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल केआमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !हुज़ूर की आमद ! मरहबा !पुर-नूर की आमद ! मरहबा !आक़ा की आमद ! मरहबा !दाता की आमद ! मरहबा !सच्चे की आमद ! मरहबा !मरहबा ! मरहबा !

शब-ए-मीलाद-ए-अक़्दस थी मसर्रत ज़र्रे ज़र्रे कोमगर इब्लीस अपने साथियों में नौहा कर आया

ज़मीं बोली कि बुत-ख़ाने से पाक-ओ-साफ़ होती हूँनिदा का'बे से उट्ठी अब मेरा मक़्सूद बर आया

मरहबा ! मरहबा !

आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल केआमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के

ख़ुशियाँ मनाओ, झंडे लगाओ, घर को सजाओ मिल केअपने नबी की 'अज़मत के तुम गीत सुनाओ मिल के

चराग़ाँ ही चराग़ाँ हों, ख़ुशी के शादियाने होंमेरे आक़ा की आमद है, सदाएँ मरहबा की हों

चलो, ऐ मुफ़लिसो ! जो आज माँगोगे वो पाओगेकि सदक़ा बाँटता अर्ज़-ओ-समा का ताजवर आया

जमील-ए-क़ादरी ! जब सब्ज़-गुंबद उन का देखूँगातो समझूँगा मेरी नख़्ल-ए-तमन्ना में समर आया

मरहबा ! मरहबा !

आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल केआमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !हुज़ूर की आमद ! मरहबा !पुर-नूर की आमद ! मरहबा !आक़ा की आमद ! मरहबा !दाता की आमद ! मरहबा !सच्चे की आमद ! मरहबा !मरहबा ! मरहबा !

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