नात लिरिक्स

Ya Muhammad Mustafa Donon Aalam Ke Wali

या मुहम्मद मुस्तफ़ा दोनों आलम के वाली

नात ख़्वान: अमजद बल्तिस्तानीशायर: मिर्ज़ा हसन मुज्तबाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या मुहम्मद ! या मुहम्मद !

या मुहम्मद ! या मुहम्मद ! या मुहम्मद !या मुहम्मद ! या मुहम्मद ! या मुहम्मद !

या मुहम्मद मुस्तफ़ा दोनों 'आलम के वाली !जो आ गया दर पे तेरे लौटा नहीं ख़ाली

या मुहम्मद मुस्तफ़ा दोनों 'आलम के वाली !

महबूब-ए-रब, ख़त्म-ए-रुसुल, सरदार-ए-दो 'आलमबा'द-ए-ख़ुदा तुम मालिक-ओ-मुख़्तार-ए-दो 'आलमहै शान सारे नबियों में तेरी निराली

या मुहम्मद मुस्तफ़ा दोनों 'आलम के वाली !

तुम साहिब-ए-मे'राज हो, सुल्तान-ए-जहाँ होक़ुर्बां तेरे क़दमों पे क्यूँ न कौन-ओ-मकाँ होसब ताज वाले हैं तेरे दर के सवाली

या मुहम्मद मुस्तफ़ा दोनों 'आलम के वाली !

या मुहम्मद ! या मुहम्मद ! या मुहम्मद !या मुहम्मद ! या मुहम्मद ! या मुहम्मद !

मुझ पर भी करम कीजिए, सरकार-ए-मदीना !इक बार मैं भी देख लूँ दरबार-ए-मदीनाहोंटों से लगा लूँ तेरे रौज़े की जाली

या मुहम्मद मुस्तफ़ा दोनों 'आलम के वाली !

अमजद और हसन को जो सना-ख़्वाँ है बनायातक़दीर को सूरज की तरह तुम ने जगायानज़र-ए-करम जो ख़ाक के ज़र्रों पे डाली

या मुहम्मद मुस्तफ़ा दोनों 'आलम के वाली !

या मुहम्मद ! या मुहम्मद ! या मुहम्मद !या मुहम्मद ! या मुहम्मद ! या मुहम्मद !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।