नात लिरिक्स

Ya Ghaus Ya Meeran Abdul Qadir Shah-e-Jilani

या ग़ौस या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी

शायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !तुम्ही हो महबूब-ए-सुब्हानी, क़ुत्ब-ए-रब्बानी

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !

अल्लाह रे क्या मर्तबा-ए-ग़ौस-ए-जली हैगर्दन को झुकाए हुए हर एक वली है

औलाद-ए-हसन, आल-ए-हुसैन इब्न-ए-'अली हैबेशक शह-ए-बग़दाद वली इब्न-ए-वली है

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !तुम्ही हो महबूब-ए-सुब्हानी, क़ुत्ब-ए-रब्बानी

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !

सब उन की 'इनायत है, ख़फ़ी है कि जली हैहर रस्म-ए-करम उन के घराने से चली है

है नूर जो बग़दाद की गलियों का उजालाहर एक किरन उस की मदीने से चली है

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !तुम्ही हो महबूब-ए-सुब्हानी, क़ुत्ब-ए-रब्बानी

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !

इक सिलसिला-ए-नूर है, हर साँस का रिस्ताईमान मेरा हुब्ब-ए-नबी, मेहर-ए-'अली है

मैं उन का हूँ ता-हश्र, नसीर ! उन का रहूँगासद-शुक्र कि उन से मेरी निस्बत अज़ली है

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !तुम्ही हो महबूब-ए-सुब्हानी, क़ुत्ब-ए-रब्बानी

या ग़ौस ! या मीराँ अब्दुल क़ादिर शाह-ए-जीलानी !

या ग़ौस ! या मीराँ मीराँ ! या मीराँ ! या मीराँ मीराँ !या ग़ौस ! या मीराँ मीराँ ! या मीराँ ! या मीराँ मीराँ !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।