नात लिरिक्स

Ya Awwalu Makhluqin Lillah Tujhe Baad-e-Khuda Yakta Jana | Lam Yaati Nazeeruka Fee Nazarin With Tazmeen

या अव्वलु मख़लूक़िन लिल्लाह तुझे बाद-ए-ख़ुदा यकता जाना | लम-याति नज़ीरुका फ़ी नज़रिन तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: अक़ील रज़ा सिद्दीक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या अव्वलु मख़लूक़िन लिल्लाह ! तुझे बा'द-ए-ख़ुदा यकता जानाहो सारी ख़ुदाई के दाता, तुम्हें मालिक-ए-कंज़-ए-ख़ुदा जानाहै ज़िक्र बड़ा ऊँचा तेरा, तुझे हम ने ख़ुदा की 'अता जानालम-याति नज़ीरुका फ़ी नज़रिन, मिस्ल-ए-तो न शुद पैदा जानाजग राज को ताज तोरे सर सो, है तुझ को शह-ए-दो-सरा जाना

सैलाब तलातुम-ख़ेज़ उठा, हर सिम्त है इक हलचल बरपागर्दिश में सफ़ीना आने लगा, अब हाल न जाने क्या होगातेरी ज़ात है दाफ़े'-ए-रंज-ओ-बला, ऐ नूह की कश्ती के मौला !अल-बहरु 'अला वल-मौजु तग़ा, मन बेकस-ओ-तूफ़ाँ होश-रुबामंजधार में हूँ बिगड़ी है हवा, मोरी नय्या पार लगा जाना

कहती है यही चश्म-ए-पुरनम, मेरी दीदा-वरी का रख लो भरममेरे ख़्वाब में, ऐ सरकार-ए-उमम ! इक बार तो कीजिए रंजा-क़दमक्या 'अर्ज़ करूँ फ़ुर्क़त के सितम है मुझ पे पड़ा इक कोह-ए-अलमअना फ़ी 'अतशि-व्व-सख़ाका अतम, ऐ गेसू-ए-पाक ऐ अब्र-ए-करम !बरसन हारे रिम-झिम रिम-झिम, दो बूँद इधर भी गिरा जाना

दे अपना मुझे वो दर्द-ए-विला, हो दिल में तड़प तेरी पैदामेरी ज़ीस्त का तू हासिल हो जा, हो तुझ पे हमारी जान फ़िदाजब 'इश्क़-ए-बिलाली याद आया, इक 'आशिक़-ए-सादिक़ बोल उठाअर्रुहु़ फ़िदाका फ़ज़िद हरक़ा, यक शो'ला दिगर बर्ज़न 'इश्क़ामोरा तन मन धन सब फूँक दिया, ये जान भी प्यारे जला जाना

तज़मीन जो मैं लिखने को चला, यूँ कहिए नसीबा जाग उठाकुछ लुत्फ़ 'अजब महसूस हुआ, फिर कैफ़ का 'आलम छाने लगाहर सिम्त थी ख़ुश्बूदार फ़ज़ा, उस वक़्त उठी, बज़्मी ! ये सदाबस ख़ामा-ए-ख़ाम नवा-ए-रज़ा, न ये तर्ज़ मेरी न ये रंग मेराइर्शाद-ए-अहिब्बा नातिक़ था, नाचार इस राह पड़ा जाना

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:मुहम्मद फ़ुरक़ान बज़्मी पूरनपुरी

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।