नात लिरिक्स

Wo Mera Ali Mera Ali Mera Ali Hai

वो मेरा अली मेरा अली मेरा अली है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: सैफ़ क़ादरी इलाहाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या अमीर-उल-मोमिनीन !या अमीर-उल-मोमिनीन !

'अली 'अली ! 'अली 'अली ! 'अली 'अली 'अली !'अली 'अली ! 'अली 'अली ! 'अली 'अली 'अली !

जो शेर-ए-ख़ुदा, शान-ए-नबी, शाह-ए-वली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

शाह-ए-मर्दां, शेर-ए-यज़्दाँ, क़ुव्वत-ए-परवरदिगारला-फ़ता इल्ला 'अली, ला-सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार

दुनिया-ए-विलायत की जिसे शाही मिली हैजिस के दर-ए-'आली पे जबीं सब की झुकी हैवो जिस की सहाबा में बहुत शान बड़ी हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

जो मुफ़्लिस-ओ-लाचार को देता है सहाराचमकाता है जो सब के मुक़द्दर का सिताराहर एक बला जिस के वसीले से टली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो जिस के लिए शाह ने सूरज को फिरायावो जिस ने दिया 'इश्क़-ए-मुहम्मद का जलायावो जिस की सना ख़ुद मेरे सरकार ने की हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

शाह-ए-मर्दां, शेर-ए-यज़्दाँ, क़ुव्वत-ए-परवरदिगारला-फ़ता इल्ला 'अली, ला-सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार

हर एक तरफ़ जिस की विलायत का है चर्चाअब्दाल-ओ-वली, ग़ौस-ओ-क़ुतब जिस के हैं शैदावो जिस के दर-ए-पाक पे रिफ़'अत भी झुकी हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

इक आन में दरवाज़ा-ए-ख़ैबर को उखाड़ाइक वार में ही जिस ने है मरहब को पछाड़ाजिस ज़ात की कौनैन में इक धूम मची हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

'अली 'अली ! 'अली 'अली ! 'अली 'अली 'अली !'अली 'अली ! 'अली 'अली ! 'अली 'अली 'अली !

उम्मत का निगहबान जिसे रब ने बनायासरकार ने बिस्तर पे जिसे अपने सुलायाजिस ज़ात का क़ुरआन में भी ज़िक्र-ए-जली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

जो पल में फ़क़ीरों को बनाता है शहंशाहजन्नत की तरह, सैफ़-ए-हज़ीं ! जिस की है दरगाहहसनैन का बाबा है जो दामाद-ए-नबी हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

वो मेरा 'अली है, वो मेरा 'अली हैवो मेरा 'अली, मेरा 'अली, मेरा 'अली है

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