नात लिरिक्स

Wo Mah-e-Farozan Wo Nayyar-e-Taaban | Mera Mustafa Hai

वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँ | मेरा मुस्तफ़ा है

नात ख़्वान: क़ारी शाहीद महमूद क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँमेरा मुस्तफ़ा है, मेरा मुस्तफ़ा हैवो बारह रबी'-उल-अव्वल को आयाजो अव्वल बना है, मेरा मुस्तफ़ा है

तो क्या तू ने देखा वो आना वो जानाकि हैरत में है अब तलक ये ज़मानावो रब का बुलाना, तो सब को दिखानाये जो आ रहा है, मेरा मुस्तफ़ा है

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो केकि सिदरा से आगे बशर जा रहा है

जाता है देखो वो बे-ख़ौफ़ कैसेकि सब जानता है ये राहें वो जैसेवो यूँ जा रहा है, जैसे कि कोईघर वाला अपने ही घर जा रहा है

वो क़िस्सा हलीमा के आँगन का देखोजवानी से पहले तुम बचपन का पूछोअभी मुस्तफ़ा ने उठाई है उँगलीक़मर से तो पूछो किधर जा रहा है

कहाँ तू, ऐ शाकिर ! कहाँ उन की ना'तेंकहाँ अपनी ज़ातें, कहाँ उन की बातेंये क्यूँ कह रहे हो बशर जा रहा हैहक़ीक़त में ख़ैर-उल-बशर जा रहा है

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