नात लिरिक्स

Wo Ban Mein Qadam Rakh Den To Ban Jata Hai Ban Phool | Sar-Ta-Ba-Qadam Hai Tan-e-Sultan-e-Zaman Phool With Tazmeen

वो बन में क़दम रख दें तो बन जाता है बन फूल | सर-ता-ब-क़दम है तन-ए-सुल्तान-ए-ज़मन फूल तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो बन में क़दम रख दें तो बन जाता है बन फूलजिस फूल को वो छू लें वो हो रश्क-ए-चमन फूलमैं क्यूँ कहूँ कि सिर्फ़ है आक़ा का दहन फूलसर-ता-ब-क़दम है तन-ए-सुल्तान-ए-ज़मन फूललब फूल दहन फूल ज़क़न फूल बदन फूल

आराम गुनहगार को इक पल नहीं मिलतासर से मेरे आलाम का सूरज नहीं ढलतामैं क्या करूँ, सरकार ! मेरा बस नहीं चलतातिनका भी हमारे तो हिलाए नहीं हिलतातुम चाहो तो हो जाए अभी कोह-ए-मिहन फूल

अल्लाह ने सरकार की वो शान बनाईवल्लाह कोई कर नहीं सकता है बड़ाईहैरान हुई देख के ये सारी ख़ुदाईदंदान-ओ-लब-ओ-ज़ुल्फ़-ओ-रुख़-ए-शह के फ़िदाईहैं दुर्र-ए-'अदन, ला'ल-ए-यमन, मुश्क-ए-ख़ुतन, फूल

ऐ मालिक-ए-कुल, रश्क-ए-जहाँ, शाह-ए-रसूलाँमहबूब-ए-ख़ुदा, नूर-ए-ख़ुदा, रहमत-ए-यज़्दाँहै 'अर्ज़ की अहबाब न हों मुझ से परेशाँहों बार-ए-गुनह से न ख़जिल दोश-ए-'अज़ीज़ाँलिल्लाह मेरी ना'श कर, ऐ जान-ए-चमन फूल

कहता है बशर अपनी तरह वो है कमीनादिखलाओ उसे शहर-ए-बरेली का क़रीनाउस 'आशिक़-ए-सादिक़ ने बड़ी बात कही नावल्लाह जो मिल जाए मेरे गुल का पसीनामाँगे न कभी 'इत्र, न फिर चाहे दुल्हन फूल

औक़ात, वसी ! तेरी न ही तेरे क़लम कीमत पूछ ये कि कैसे ये तज़मीन रक़म कीये ख़ास 'इनायत है नवासों के क़दम कीक्या बात, रज़ा ! उस चमनिस्तान-ए-करम कीज़हरा है कली जिस में, हुसैन और हसन फूल

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:सय्यिद अब्दुल वसी रज़वी

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