नात लिरिक्स

Waah ! Kya Shaan Hai, Ai Haafiz-e-Millat ! Teri

वाह ! क्या शान है, ए हाफ़िज़-ए-मिल्लत ! तेरी

नात ख़्वान: क़ारी तय्यब अत्तारीशायर: मौलाना मुहम्मद क़ासिम निज़ामी मिस्बाहीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वाह ! क्या शान है, ए हाफ़िज़-ए-मिल्लत ! तेरीआसमाँ देख के हैरान है रिफ़'अत तेरी

बाग़-ए-फ़िरदौस की सूरत में ये दीनी क़िल'आसय्यिदि हाफ़िज़-ए-मिल्लत ! है करामत तेरी

तू ने इस बाग़ को है ख़ून-ए-जिगर से सींचाता-क़यामत रहे आबाद ये जन्नत तेरी

नाज़िश-ए-'इल्म-ओ-'अमल, पैकर-ए-ज़ोहद-ओ-तक़्वाथी ढली सुन्नत-ए-सरकार में सीरत तेरी

अपने बेगाने उठा पाएँ न तुझ पर ऊँगलीकितनी पाकीज़ा थी, बुल-फ़ैज़ ! तबी'अत तेरी

अपने हासिद को दिया है न कभी तू ने जवाबख़िदमत-ए-ख़ल्क़ थी बस 'आदत-ओ-फ़ितरत तेरी

सब से बढ़ कर है यही तेरी विलायत की दलीलयाद आता था ख़ुदा देख के सूरत तेरी

तेरे मज़हर हैं ये 'अल्लामा मुहम्मद अहमदइन में आती है नज़र फ़िक्र-ओ-बसीरत तेरी

कासा-ए-दिल लिए हाज़िर है ये क़ासिम दर परइस पे हो जाए, शहा ! नज़र-ए-'इनायत तेरी

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