नात लिरिक्स

Urs Aaya Hai Waliyon Ke Sultan Ka Marhaba Marhaba | Batta Hai Sadqa Khwaja Ke Faizan Ka Marhaba Marhaba

उर्स आया है वलियों के सुल्तान का मरहबा मरहबा | बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का मरहबा मरहबा

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़रीब जान के हर इक ने मुझ को टाला हैतुम अपने दर से न टालो मुझे, ग़रीब नवाज़ !

'उर्स आया है वलियों के सुल्तान का, मरहबा मरहबा !बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का, मरहबा मरहबा !जगमगा उट्ठा फिर दीप ईमान का, मरहबा मरहबा !क्या हसीं है समाँ उन के ऐवान का, मरहबा मरहबा !

खिल उठा चेहरा हर एक मुसलमान का, मरहबा मरहबा !

'उर्स आया है वलियों के सुल्तान का, मरहबा मरहबा !बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का, मरहबा मरहबा !

वो 'अता-ए-नबी फ़ज़्ल-ए-रहमान है, वाह क्या शान हैइब्न-ए-ज़हरा है, हसनैन की जान है, वाह क्या शान हैहिन्द की सर-ज़मीं का वो सुल्तान है, वाह क्या शान हैमैं ही क्या उस पे हर एक क़ुर्बान है, वाह क्या शान है

फूल है वो 'अली के गुलिस्तान का, मरहबा मरहबा !

'उर्स आया है वलियों के सुल्तान का, मरहबा मरहबा !बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का, मरहबा मरहबा !

ग़ुस्ल आब-ए-करम से कराया गया, मरहबा मरहबा !नूरी जोड़े से तन जगमगाया गया, मरहबा मरहबा !सर पे ताज-ए-विलायत सजाया गया, मरहबा मरहबा !मेरे ख़्वाजा को दूल्हा बनाया गया, मरहबा मरहबा !

और सदक़ा मिला शाह-ए-जीलान का, मरहबा मरहबा !

'उर्स आया है वलियों के सुल्तान का, मरहबा मरहबा !बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का, मरहबा मरहबा !

एक कासे में दरिया जमा' कर दिया, क्या से क्या कर दियामँगता को आप ने बादशाह कर दिया, क्या से क्या कर दियाएक जोगी को 'अब्द-ए-ख़ुदा कर दिया, क्या से क्या कर दियाजिस ने जो माँगा उस को 'अता कर दिया, क्या से क्या कर दिया

कोई सानी नहीं आप की शान का, मरहबा मरहबा !

'उर्स आया है वलियों के सुल्तान का, मरहबा मरहबा !बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का, मरहबा मरहबा !

दर पे आए हैं दामन पसारे हुए, ग़म के मारे हुएदुख मुसीबत बलाओं से हारे हुए, ग़म के मारे हुएसब ने ठुकराया हम बे-सहारे हुए, ग़म के मारे हुएवक़्त ग़ुर्बत में अपना गुज़ारे हुए, ग़म के मारे हुए

डाल दो सदक़ा झोली में 'उस्मान का, मरहबा मरहबा !

'उर्स आया है वलियों के सुल्तान का, मरहबा मरहबा !बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का, मरहबा मरहबा !

शा'इरी को मेरी ख़ूब चर्चा मिले, तेरा सदक़ा मिलेइस के बदले शफ़ा'अत का मुज़्दा मिले, तेरा सदक़ा मिलेऔर कलाम-ए-रज़ा का भी छींटा मिले, तेरा सदक़ा मिले'आसिम-उल-क़ादरी को ये तोहफ़ा मिले, तेरा सदक़ा मिले

हो क़लम को 'अता फ़ैज़ हस्सान का, मरहबा मरहबा !

'उर्स आया है वलियों के सुल्तान का, मरहबा मरहबा !बटता है सदक़ा ख़्वाजा के फ़ैज़ान का, मरहबा मरहबा !

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