नात लिरिक्स

Ulfat Mein Teri, Aaqa ! Majnoon Kaha Gaya Hun

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

नात ख़्वान: हाफ़िज़ सअ'दुल्लाह मदनी - शब्बीर अहमद मुज़फ़्फ़रपुरीशायर: मौलाना वलीउल्लाह वली क़ासमी बस्तवीउपलब्ध: हिंदी

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँदीवाना तेरे दर का, कहता सुना गया हूँ

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

जब से मिली ग़ुलामी, मैं सुर्ख़-रू हुआ हूँमैं तेरा नाम ले कर आ'लम पे छा गया हूँ

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

मुद्दत से सह रहा था मैं तो ग़म-ए-जुदाईरब का करम के तेरे रोज़े पे आ गया हूँ

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

मैं दिल को रख के, आक़ा ! रोज़े की जालियों परतेरी इनायतों का क़र्ज़ा चुका गया हूँ

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

मुझ को राह-ए-वफ़ा में जो भी मिला है राहीदीवानगी का उस को रस्ता बता गया हूँ

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

हुस्न-ए-नज़र से जिस ने रोज़े को तेरे देखाआँखों में उस की बन के सुर्मा समा गया हूँ

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

दरबार-ए-मुस्तफ़ा की मिट्टी मिली जो मुझ कोमैं तो, वली ! उसी को तोशा बना गया हूँ

उल्फ़त में तेरी, आक़ा ! मजनूँ कहा गया हूँ

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