नात लिरिक्स

Ujala Jis Ka Hai Do Jahan Mein | Sallallahu Ala Muhammad

उजाला जिस का है दो जहाँ में | सल्ललाहु अला मुहम्मद

नात ख़्वान: मुनाज़िर हुसैन बदायुनीशायर: नज़्मी मियाँउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सल्ललाहु 'अला मुहम्मदसल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम

उजाला जिस का है दो जहाँ में वो मेरे आक़ा की रौशनी हैउन्हीं के क़दमों की बरकतों से ये ज़िंदगी आज ज़िंदगी है

उन्हीं का चर्चा है आसमाँ पर, ज़मीं पे भी ज़िक्र है उन्हीं काहर एक गुल में, हर इक कली में महक उन्हीं की बसी हुई है

दुरूद पढ़ना, सलाम पढ़ना, हर एक पल उन का नाम पढ़नाजो 'अर्ज़ करना हो उन से करना, सिखाया रब ने हमें यही है

दुरूद पढ़ना, सलाम पढ़ना, हर एक पल उन का नाम पढ़नाजो 'अर्ज़ करना उन्हीं से करना, सिखाया रब ने हमें यही है

वो ख़ुश्बू-ए-ज़ुल्फ़-ए-मुस्तफ़ा है कि मुश्क भी हेच जिस के आगेमहकती गलियाँ ये कह रही हैं सवारी उन की अभी गई है

वो सब्ज़ गुंबद, वो उन का रौज़ा, वो उन की मस्जिद का गोशा गोशाक़दम क़दम पर लगे है ऐसा फ़लक से जन्नत उतर पड़ी है

वो क्यारी जन्नत की प्यारी प्यारी, वो उन की मेहराब, उन का मिंबरन क्यूँ मुनव्वर हो चप्पा चप्पा, ये रब के महबूब की गली है

कहाँ है दुनिया में शहर ऐसा, मदीने जैसा, मदीने जैसाहै फ़ख़्र-ए-जन्नत ज़मीं का टुकड़ा जहाँ मज़ार-ए-नबी बनी है

गुनाहगारों के हक़ में रहमत, परहेज़गारों के हक़ में राहतवो ज़ात-ए-अक़्दस कि जिस की शफ़क़त हर इक पे यक्साँ बरस रही है

हिसाब का दिन कठिन तो होगा मगर हमें उन का आसरा हैवो आ ही जाएँगे बख़्शवाने शफ़ा'अत उन को 'अता हुई है

वही हैं अहमद, वही मुहम्मद, वही हैं महमूद, वो हैं हामिदहमीद वो हैं, स'ईद वो हैं, उन्हीं से नज़्मी की लौ लगी है

बनेगा जाने का फिर बहाना, कहेगा आ कर कोई दीवानाचलो, दीवानो ! तुम्हें मदीने, मदीने वाले बुला रहे हैं

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