नात लिरिक्स

Madine Ki Angoothi Hai, Nageena Ghaus-e-Aazam Ka

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

शायर: नज़्मी मियाँउपलब्ध: हिंदी

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म काजहाँ में बटता है हर-सू ख़ज़ीना ग़ौस-ए-आज़म का

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

'मुरीदी ला-तख़फ़' की दी तसल्ली हम ग़ुलामों कोडूबो सकता नहीं तूफ़ाँ सफ़ीना ग़ौस-ए-आज़म का

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

वसीला क़ुर्ब-ए-रब का है मुहम्मद मुस्तफ़ा बे-शक !मुहम्मद तक पहुँचने का है ज़ीना ग़ौस-ए-आज़म का

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

न जाने किस बिना पर मुश्क-ओ-अंबर फ़ख़्र करते हैंज़रा सुँघवाओ उन सब को पसीना ग़ौस-ए-आज़म का

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

क़दम मेरा सभी वलियों की गर्दन पर, ये फ़रमायाक़दम ये है तो कैसा होगा सीना ग़ौस-ए-आज़म का

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

हमारी ज़िंदगी भी ख़िदमत-ए-मख़्लूक़ में गुज़रेइलाही ! कर अता हम को क़रीना ग़ौस-ए-आज़म का

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

सर-ए-महशर पुकारा जाएगा यूँ नाम नज़्मी काये नज़्मी कौन है ? हाँ हाँ वही ना ! ग़ौस-ए-आज़म का !

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आज़म का

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