नात लिरिक्स

Alfaaz Nahin Milte, Sarkaar Ko Kya Kahiye

अल्फ़ाज़ नहीं मिलते, सरकार को क्या कहिये

नात ख़्वान: मुनाज़िर हुसैन बरकातीशायर: नज़्मी मियाँउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अल्फ़ाज़ नहीं मिलते, सरकार को क्या कहियेजिब्रील सलामी दें, दरबार को क्या कहिये

अल्फ़ाज़ नहीं मिलते, सरकार को क्या कहिये

अख़लाक़-ए-मुहम्मद की क्या शान निराली हैदुश्मन भी पढ़ें कलमा, किरदार को क्या कहिये

अल्फ़ाज़ नहीं मिलते, सरकार को क्या कहिये

बस एक पलक झपकी, मे'राज हुई पूरीउस साहिब-ए-रिफ़'अत की रफ़्तार को क्या कहिये

अल्फ़ाज़ नहीं मिलते, सरकार को क्या कहिये

एक एक सहाबी पर फ़िरदौस भी नाज़ाँ हैसिद्दीक़-ओ-'उमर, 'उस्माँ, क़र्रार को क्या कहिये

अल्फ़ाज़ नहीं मिलते, सरकार को क्या कहिये

वो ग़ार कि जिस ने इक तारीख़ बनाई हैउस ग़ार को क्या कहिये, उस यार को क्या कहिये

अल्फ़ाज़ नहीं मिलते, सरकार को क्या कहिये

नज़्मी ! तेरी ना'तों का अंदाज़ निराला हैमज़मून अनोखे हैं, अश'आर को क्या कहिये

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