नात लिरिक्स

Khak-e-Taiba Mere Seene Se Laga Di Jaye

ख़ाक-ए-तयबा मेरे सीने से लगा दी जाए

नात ख़्वान: क़ारी रियाज़ुद्दीन अशरफ़ीशायर: नज़्मी मियाँउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ाक-ए-तयबा मेरे सीने से लगा दी जाएहाँ ! बशारत मुझे जन्नत की सुना दी जाए

महफ़िल-ए-ना'त फिर इक बार सजा दी जाएक़ल्ब-ए-दुश्मन की जलन और बढ़ा दी जाए

होश आएगा न दुनिया की दवाओं से मुझेना'ल-ए-सरकार-ए-दो-'आलम की हवा दी जाए

'इश्क़ गर जुर्म है, फाँसी की सज़ा दो मुझ कोदर-ए-महबूब पे लेकिन ये सज़ा दी जाए

जिस पसीने की महक मक्के की गलियों में रचीवही ख़ुश्बू मुझे इक बार सुँघा दी जाए

इब्न-ए-ख़त्ताब को फ़ारूक़ बनाया जिस नेवही तस्वीर मेरे दिल में बिठा दी जाए

या नबी ! मुझ को भी हासिल हो ग़ुलामी का शरफ़मेरी ना'तों में भी तासीर-ए-रज़ा दी जाए

हश्र के रोज़ मैं आक़ा की सुनाऊँ ना'तेंरब कहे, नज़्मी को फ़िरदौस में जा दी जाए

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