नात लिरिक्स

Udhar Hazaaron Yazeed Waale, Idhar Bahattar Husain Waale

उधर हज़ारों यज़ीद वाले, इधर बहत्तर हुसैन वाले

नात ख़्वान: शु'ऐब रज़ा क़ादरीशायर: शु'ऐब रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उधर हज़ारों यज़ीद वाले, इधर बहत्तर हुसैन वालेडरे नहीं हैं, दबे नहीं हैं मगर कहीं पर हुसैन वाले

वहीं से पानी निकल के आता, वहीं पे दरिया मचल के बहताअगर लगाते कहीं पे कर्बल में एक ठोकर हुसैन वाले

कभी वो अब्बास और क़ासिम, कभी वो अकबर, कभी वो असग़रये अपने ख़ैमे से आ रहे हैं निकल निकल कर हुसैन वाले

दहल रही है ज़मीन-ए-कर्बल, यज़ीदियों पे बनी है दलदलवो कर्बला में दिखा रहे हैं 'अली के जौहर हुसैन वाले

पहुँच के दरिया पे बोले अब्बास, बुझाएँ अपनी क्यूँ तुझ से हम प्यासफ़ुरात क्या है ये तेरा पानी, पिएँगे कौसर हुसैन वाले

शु'ऐब ! कह दो हुसैनियों से, तमाम दुनिया के सुन्नियों सेछुपेंगे दामन में मुस्तफ़ा के ब-रोज़-ए-महशर हुसैन वाले

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।