नात लिरिक्स

Tum Apna Daaman Bichha Ke Maango | Huzoor Denge Zaroor Denge

तुम अपना दामन बिछा के माँगो | हुज़ूर देंगे ज़रूर देंगे

नात ख़्वान: सबीह रहमानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तुम अपना दामन बिछा के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगेदिलों को कासा बना के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

जहाँ से मौला 'अली ने माँगा, जहाँ से हर इक वली ने माँगाउन्हीं की चौखट पे जा के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

करीम दाता, 'अज़ीम आक़ा के दर पे कोई कमी नहीं हैतो आओ आँसू बहा के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

करीम दाता, रहीम आक़ा के दर पे कोई कमी नहीं हैग़ुलामो ! आँसू बहा के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

रसूल-ए-अकरम के आस्ताने से माँगने का उसूल ये हैदुरूद लब पर सजा के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

उन्हीं से मज़बूत कर लो नाते, जो दे के एहसाँ नहीं जतातेउन्हीं को दिल में बसा के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

मुझे ये महसूस हो रहा है, सदा मदीने से आ रही हैमदीने डेरे जमा के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

रसूल-ए-अकरम की ना'त, नासिर ! ज़माने भर को सुना चुके होहुज़ूर को भी सुना के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

रसूल-ए-अकरम की ना'त, ख़ालिद ! ज़माने भर को सुना चुके होहुज़ूर को भी सुना के माँगो, हुज़ूर देंगे, ज़रूर देंगे

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